विशेष संबाददाता रामबाबू शुक्ल
मातवी : लखनऊ: मूक-बधिर खुशी के लिए सहारा बने सीएम योगी, पढ़ाई और इलाज की जिम्मेदारी ली �भावनात्मक मुलाकात की कहानीलखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात कानपुर की 20 वर्षीय मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता और उसके परिवार के लिए जीवनभर याद रहने वाला भावुक पल बन गया।� खुशी बिना बताए कानपुर से अकेले लखनऊ आ गई थी और अपने हाथों से बनाया हुआ मुख्यमंत्री योगी का चित्र भेंट करना चाहती थी।�बिना बोले समझा ‘खुशी’ का दर्दलोकभवन के बाहर रास्ता भटककर रो रही खुशी पर जब पुलिस की नजर पड़ी तो पूरा मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा।� मुलाकात के दौरान खुशी बोल नहीं सकी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी ने उसके हाव-भाव और स्थिति को समझते हुए उसके दर्द और संघर्ष को संवेदना के साथ महसूस किया।�मुख्यमंत्री बने मजबूत सहारासीएम योगी आदित्यनाथ ने खुशी की पढ़ाई, स्किल डेवलपमेंट और कान के इलाज की पूरी जिम्मेदारी उठाने का वचन दिया।� उन्होंने कानपुर स्थित मूक-बधिर कॉलेज में दाखिले, पढ़ाई के लिए मोबाइल-टैबलेट और उसके परिवार के लिए आवास की व्यवस्था कराने का आश्वासन भी दिया।�चित्र ने जोड़ी भावनाओं की डोरखुशी ने मुख्यमंत्री योगी का स्वयं बनाया चित्र और उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेंटिंग भी भेंट की, जिसे सीएम ने बड़े स्नेह से स्वीकार किया।� मुख्यमंत्री ने उसे पास बुलाकर हौसला बढ़ाया, वहीं माता-पिता भावुक होकर इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते रहे।�मानवीय संवेदना की मिसालआर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी खुशी के सपनों को सहारा देकर मुख्यमंत्री योगी ने शासन के मानवीय और संवेदनशील चेहरे की झलक दिखाई।� यह घटना संदेश देती है कि सच्ची लगन और निश्छल भावनाएं व्यवस्था की दीवारों को पार कर सीधे संवेदना के दरवाजे तक पहुंच सकती हैं।�
