हाईकोर्ट ने लगाई एलडीए को फटकार, कहा- अवैध निर्माण सील करें तो उसके बाद भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
एफ.आयी टावर व अस्पताल को राहत, हाई कोर्ट से मिला स्टे।
एफ आयी टावर के रेजीडेंस को कुछ समय के लिए राहत की साँस मिली हैं। लखनऊ के चर्चित एफ. आयी बिल्डर मामले में पिछले कुछ दिनों से लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा बुल्डोजर की कार्रवाई चरम सीमा पर चल रही थी। जिसके कारण यहाँ रहने वाले लोगों में लगातार दशहत का माहौल बना हुआ था। पाँच दिसंबर को एफ आयी हॉस्पिटल व बिल्डर्स की हाई कोर्ट में सुनवाई हुई जहाँ बिल्डर ने व अस्पताल प्रबंधन ने जस्टिस विवेक चौधरी (डिवीज़न बेंच लखनऊ खंडपीठ) के सामने अपना पक्ष रखा। एफ आयी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जैन माथुर ने कोर्ट को बताया की लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा की जा रही कार्यवाही पूर्ण रूप से असंवैधानिक है और विरोधियों द्वारा प्रेरित है। अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने सभी ज़रूरी साक्ष्य प्रस्तुत करें और अदालत को यह बताया की पिछले 19 साल से एफ. आयी हॉस्पिटल बिना किसी विवाद के लोगों की सेवा व इलाज कर रहा है जिससे आस पास के लोग लाभान्वित होते रहे है। अधिवक्ता ने बताया की बिना किसी ध्वस्तिकरण का ऑर्डर मुहैया कराए, LDA द्वारा जान बूझ कर यह कार्यवाही की गई जोकि पूर्ण रूप से ग़ैर क़ानूनी है। सीनियर अधिवक्ता द्वारा यह बताया गया की उनके क्लाइंट द्वारा डिमोलीशन ऑर्डर माँगने के बावजूद भी विभाग द्वारा इसकी कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई। सुनवाई के दौरान एफ.आयी के अधिवक्ता ने जज को बताया कि वर्तमान में जिस वक़्त माननीय उच्च न्यायालय में इस पूरे मामले की सुनवाई चल रही है इस दौरान भी बुलडोजर एक्शन जारी है,
यह सुनते ही जज साहब द्वारा LDA को फटकार लगायी गई और जज साहब द्वारा तुरंत ध्वस्तिकरण की कार्यवाही को रोकने के लिए कहा गया। जज साहब ने कहा कि अभी मामले की सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है और ऐसे में लखनऊ प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तिकरण की कार्यवाही कैसे की जा सकती है?
हाईकोर्ट ने सख़्त रवैया अपनाते हुए सरकार को और लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है, मामले की गंभीरता को देखते हुए हाइ कोर्ट द्वारा फ़िलहाल बुल्डोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है।
कोर्ट ने एलडीए को दिया सील करते समय हो फोटोग्राफी व वीडियेाग्राफी करने का निर्देश
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जतायी नाराजगी
लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नियम के विरूद्ध हो रहे अवेध निर्माणों को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को कड़ी फटकार लगायी है। अदालत ने कहा है कि एलडीए जब एक बार किसी अवैध निर्माण को सील करे तो फिर वह इस बात को भी सुनिश्चित करे की उसके बाद और कोई निर्माण न होने पाए।
अदालत ने लखनऊ के रवींद्र गार्डेन अलीगंज में प्लाट नंबर ई 29 पर नियम विरूद्ध हो रहे निर्माण को तत्काल रेाकने के आदेश दिए हैं और साथ ही एलडीए को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि वहां कोई निर्माण कार्य न हो और यदि आवश्यकता हो तो लोकल पुलिस की मदद ली जाए।
अदालत ने याचिका पर सुनवायी के दौरान शहर में हो रहे अवैध निर्माणों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एलडीए अपनी जिम्मेदारी को ठीक ढंग से निभाए। निभाये। कोर्ट ने प्रस्तुत मामले में एलडीए द्वारा अवैध निर्माण सील कर देने के बाद भी निर्माण जारी रहने पर कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि एलडीए केवल अवैध निर्माण सील करने से ही फुर्सत नहीं मिल जाती। उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि सील करने के बाद उक्त जगह पर कोई निर्माण न होने पाए।
यह आदेश जस्टिस अनिल कुमार व जस्टिस सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने 81 वर्षीय वृद्धा श्रीमती राधा रानी सिंह की याचिका पर पारित किया। याची का कहना था कि उसके घर के बगल में बेसमेंट का अवैध निर्माण हो रहा है जिसके चलते उसके मकान में दरारें आ गयी हैं।
वहीं, एलडीए ने कहा कि उसने बेसमेंट वाल मकान सील कर उसका कब्जा पुलिस को दे दिया है लिहाजा यदि वहां अब भी निर्माण हो रहा है तो पुलिस की जिम्मेदारी उसकी नहीं। कोर्ट ने इस पर घोर नाराजगी जताई।
