औरैया में पराली पर 'महा-एक्शन': धुआं उठा तो नपेंगे लेखपाल-सचिव, DM ने जारी की अधिकारियों की 'जवाबदेही लिस्ट'!
औरैया, 9 अक्टूबर 2025:
आगामी सर्दियों में पराली के धुएं से होने वाले प्रदूषण पर औरैया जिला प्रशासन ने इस बार "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपना ली है। जिलाधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की एक बड़ी 'फौज' तैयार की है। प्रशासन ने न केवल निगरानी समितियों का गठन किया है, बल्कि गांव-गांव के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके नाम और मोबाइल नंबर सहित एक विस्तृत सूची जारी कर दी है।
साफ निर्देश: खेत में आग लगी तो कर्मचारी पर गिरेगी गाज
जिलाधिकारी द्वारा जारी कार्यालय ज्ञाप में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर किसी भी राजस्व गांव में पराली जलाने की घटना सामने आती है, तो इसके लिए उस क्षेत्र में तैनात लेखपाल, ग्राम पंचायत/ग्राम विकास अधिकारी और कृषि विभाग के कर्मचारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। आदेश के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के 3 दिनों के भीतर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चार-स्तरीय निगरानी का चक्रव्यूह
प्रशासन ने पराली की रोकथाम के लिए चार स्तरों पर समितियों का गठन किया है:
जिला स्तरीय समिति: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में, जिसमें पुलिस अधीक्षक और मुख्य विकास अधिकारी समेत जिले के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं।
तहसील स्तरीय समिति: उप-जिलाधिकारी (SDM) के नेतृत्व में।
ब्लॉक स्तरीय समिति: खंड विकास अधिकारी (BDO) की अध्यक्षता में।
ग्राम पंचायत स्तरीय समिति: सबसे महत्वपूर्ण और जमीनी स्तर की इस टीम में राजस्व निरीक्षक (लेखपाल), ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) और कृषि विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जिन्हें सीधे खेतों का भ्रमण कर रिपोर्ट देनी होगी।
किसानों पर भी होगी कार्रवाई
आदेश में यह भी दोहराया गया है कि पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी प्रकार के कृषि अनुदान (सब्सिडी) से वंचित कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तहत जुर्माना भी लगाया जाएगा।
जिला प्रशासन का यह सख्त और माइक्रो-मैनेजमेंट वाला कदम स्पष्ट संकेत देता है कि इस बार पराली के धुएं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी भी बख्शे नहीं जाएंगे।

